साडी दुनिया दीयों के प्रकाश से जगमगा रहा लेकिन मई किस अँधेरे में हू गुम दीयों की जगमगाहट से झूम रहा मेरा मन कितने दिन ये ख़ुशी रहेगी कायम
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एक दिन मैं मेरे अपनों से ही परायी हो जाउंगी. परायी होकर फिर किसी से अपनाई जाउंगी. ये ज़िन्दगी का खेल तो यूँ ही चलता रहेगा. किसी का घर छोड़ तो किसी का जोड़ जाउंगी. ये दौर यूँ ही गुजरता चला जायेगा . और एक दिन इस ज़िन्दगी से भी नाता तोड़ जाउंगी. फिर समय का पहिया घूमेगा मैं वापस इस धरती पर कदम रखने आउंगी. जिन्दा दिलों से यही है विनय. मुझे आने देना ख़ुशी के साथ इस धरती पर. मैं एक नया जीवन चक्र आपके लिए निभाउंगी. ...v.maya
हमारी हिन्दी मेरे ख्वाबों की तस्वीर हो तुम मेरी रातों की नींद हो तुम तुम्हारी ही गोद में पलकर मै बड़ी हुई तुम मेरी हो और मै तुम्हारी ही रही तुम्हारी व्यथा से मै तडपती रही रात भर तुम्हारी आहों से सिसकती रही मेरे जज्बातों का एहसास हो तुम मेरी वीणा के झंकृत तार हो तुम विदेशों में तुम अपनाई गई फिर अपनों में क्यों तुम भुलाई गई क्या तुम्हारी व्यथा का किसी को एहसास नही क्यों आज तुम्हारी पहचान नही मेरे संघर्ष का पहला वार हो तुम फिर क्यों तुम ही संघर्ष करती रहीं जीवन भर पीड़ा सहती रहीं क्या हमारा तुम्हारे प्रति कोई दायित्व नहीं क्यूँ तुम्हे किसी ने पहचाना नहीं
किस जात - पांत की तू बात करता मानव किस धर्म का तूने पाठ पढ़ा इसी अगाधता के भंवर में तूने ये सारा जंजाल बुना अभी भी वक्त है संभल जा मत होने दे नरसंहार यहाँ कह रही ये फूट - फूट कर रोटी ये धरा .
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